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Saturday, December 29, 2018

तीन की मौत, फिर भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तैयार नहीं हुआ फ्लू वार्ड

चूरू.

जिले में स्वाइन फ्लू तेजी से पांव पसार रहा है। यह बीमारी इस साल में अब तक 12 लोगों को चपेट में ले चुका है। दिसंबर माह में ही चार-पांच लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इसमें तीन की मौत भी हो चुकी है लेकिन मेडिकल कॉलेज से जुड़ा डेडराज भरतिया अस्पताल अभी तक स्वाइन फ्लू वार्ड को भी तैयार नहीं कर सका है। यहां तक कि अभी तक संबंधित कुछ दवाएं व सामग्री भी नहीं खरीदी गई है जबकि सरकार की ओर से दवा खरीदने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए दिए हैं। वहीं अस्पताल का दावा है कि उनके पास कुछ सामान पहले से उपलब्ध है। जाहिर हो रहा है कि इस मौसमी बीमारी को लेकर अस्पताल प्रशासन कितना गंभीर है।

 

स्वाइन फ्लू वार्ड में कौन ड्यूटी करेगा कौन एक्सपर्ट सैंपल लेगा इसकी कोई भी तैयारी नहीं है। हालांकि फिजीशिनय डा. मोहम्मद आरिफ को स्वाइन फ्लू वार्ड का प्रभारी लगा दिया गया है। लेकिन अन्य स्टाफ की नियुक्ति अभी तक कागजों में ही चल रही है। चूंकि वार्ड में वेंटीलेटर भी चलाने पड़ते हैं ऐसे में एक्सपर्ट नर्सिंग स्टाफ का होना जरूरी है। लेकिन स्वाइन फ्लू के सैंपल लेने व वेंटीलेटर लगाने के प्रशिक्षण ले चुके नर्सिंगकर्मी इधर-उधर लगाए गए हैं। वार्ड में अभी तक वेंटीलेटर के साथ लगने वाले मॉनिटर भी नहीं लगाए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि जैरियार्टिक वार्ड में स्वाइन फ्लू रोगियों को भर्ती करने के लिए दो वार्ड बनाए गए हैं। एक में पॉजिटिव मरीजों और दूसरे में संदिग्ध रोगियों को भर्ती किया जाएगा। पॉजिटिव मरीजों के वार्ड में वेंटीलेटर, सेक्शन मशीन, स्वचालित बेड लगवाए हैं।

 

बचाव के लिए क्या करें


फिजीशियन डा. नितेश तोषाण ने बताया कि छींकते व खांसते समय मुह को रुमाल से ढके, समय-समय पर हाथों को धोते रहे। आंख, नाक और मुंह को अनावश्यक नहीं छुएं, बीमार व्यक्ति से ऊचित दूरी बनाए रखें। अधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। रोगी से हाथ नहीं मिलाएं और गले नहीं मिले। डाक्टर की सलाह के बगैर दवा नहीं लें। बिना मास्क के स्वाइन फ्लू रोगी के पास नहीं जाएं। आलू, चावल, तथा शर्करायुक्त पदार्थों का सेवन कम करें। इसका अधिक प्रयोग करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। पॉजिटिव आने पर दही का उपयोग नहीं करें।

 

जानिए क्या है स्वाइन फ्लू

मेडिकल कॉलेज के सहायक आचार्य डा. मो. आरिफ ने बताया कि स्वाइन फ्लू एच-1 एन-1 टाइप के एक विषाणु से होने वाला श्वसन तंत्र का संक्रामक रोग है। ये आम फ्लू की तरह होता है। सबसे पहले इस बीमारी के लक्षण अप्रेल 2009 में मैक्सिकों के एक ***** फार्म के आस-पास रह रहे लोगों में पाया गया था।इससे देश में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।

 

कैसे फैलता है स्वाइ फ्लू


यह संक्रामित व्यक्ति के खांसने या छीकने, विषाणु का किसी सतह पर जमा होने, सामान्य व्यक्ति का संक्रमित सतह को छूने, सामान्य व्यक्ति के संक्रमित होने से यह रोग दूसरों में फैलता है।

 

किसको अधिक खतरा


65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों, अन्य बड़ी बीमारी जैसे एचआईवी, क्षय रोग, मधुमेह, हृदय रोग, कर्करोग (कैंसर) से पीडि़त व्यक्ति में इसके होने व खतरे की संभावना अधिक होती है।

 

स्वाइन फ्लू के लक्षण


बुखार, खांसी, गला खराब होना, सर में दर्द, शरीर में दर्द, सर्दी लगना, थकान, उल्टी-दस्त और बेचैनी लगना आदि इसके लक्षण हैं। व्यक्ति के अंदर विषाणु आने के दूसरे-तीसरे दिन दिख जाता है लक्षण

 

यह होते हैं लक्षण


डा. आरिफ ने बताया कि स्वाइन फ्लू का विषाणु किसी सामान्य व्यक्ति के अंदर जाने से दो दिन या एक से पांच दिन के अंदर लक्षण दिखने लगते हैं। पहले दिन छींक आना, खांसी आना व बदन दर्द शुरू होने लगता है। अलगे दो से चार दिन में तेज बुखार, सांस में तकलीफ, पीला बलगम, ज्यादा छीकें आने लगती हैं। पांचवे से सांतवे दिन तक तकलीफ बढ़ जाती है। सातवें से दसवें दिन तक श्वास तंत्र फेल हो जाता है जिसकी वजह से मरीज की मौत भी हो सकती है। स्वाइन फ्लू को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है। पहले स्टेज में टेमीफ्लू देने की जरूरत नहीं होती। दूसरे स्टेज में टेमीफ्लू दी जा सकती है। तीसरी श्रेणा में मरीज को भर्ती करना जरूरी है। इसके लिए विभाग ने आदेश भी जारी किया है। 104 टोल फ्री नंबर पर इसकी जानकारी ले सकते हैं।

 

इनका कहना है


स्वाइन फ्लू को रोगियों के लिए वार्ड लगभग तैयार हो गया है। बेड व वेंटीलेटर आदि लगा दिए गए हैं। दवा खरीदने के लिए आदेश दे दिया गया है। एक या दो दिन संबंधित शेष दवाएं भी आ जाएंगी। टेमीफ्लू सहित कुछ संबंधित पर्याप्त मात्रा में हैं। स्टाफ लगाने के आदेश कर दिए गए हैं।
डा. जेएन खत्री, अधीक्षक, डीबीएच, संबद्ध मेडिकल कॉलेज चूरू



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