
कोर्ट ने झूठा मुकदमा दर्ज कराने के लिए शेखावत के खिलाफ आईपीसी की धारा 182 में दर्ज इस्तगासे पर प्रसंज्ञान ले लिया और उन्हें कई सालों से तलब करता रहा, लेकिन समन तामील ही नहीं होते थे इसलिए वे पेश ही नहीं हुए। पिछली पेशी पर उनके वकील ने अंडरटेकिंग दी तो इस मामले में पहली बार उनको महानगर मजिस्ट्रेट संख्या 8 में पेश होना पड़ा और 10 हजार रुपए का जमानत मुचलका पेश किया। कोर्ट ने मुचलका स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 30 जून को मुकर्रर की और उस तारीख पर उन्हें हाजिर रहने के भी निर्देश दिए हैं।
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